मृत्यु के बाद पुनर्जीवित हो गए थे यीशु, कैसे हुई ये अद्भुत घटना?

 30 मार्च 2018 को गुड फ्राइडे है। ईसाई धर्म के लोग गुड फ्राइडे को प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने और मानवता की रक्षा के लिए प्राण देने की याद में मनाते हैं। ईसाई धर्म के प्रमुख ग्रंथों बाइबिल और न्यू टेस्टामेंट के आधार पर ईसा मसीह मृत्यु के 3 दिन बात पुनर्जीवित हो गए थे। गुड फ्राइडे के अवसर पर हम आपको प्रभु यीशु के जीवन के बारे में बता रहे हैं-

कुंवारी लड़की के गर्भ से हुआ था यीशु का जन्म
ईसाई धर्म के अनुसार, प्रभु यीशु का जन्म बेतलेहम (जोर्डन) में कुँवारी मरियम (वर्जिन मरियम) के गर्भ से हुआ था। उनके पिता का नाम युसुफ था, जो पेशे से बढ़ई थे। स्वयं ईसा मसीह ने भी 30 वर्ष की आयु तक अपना पारिवारिक बढ़ई का व्यवसाय किया। पूरा समाज उनकी ईमानदारी और सद्व्यवहार, सभ्यता से प्रभावित था। सभी उन पर भरोसा करते थे।
यीशु ने लोगों को क्षमा, शांति, दया, करूणा, परोपकार, अहिंसा, सद्व्यवहार एवं पवित्र आचरण का उपदेश दिया। उनके इन्हीं सद्गुणों के कारण लोग उन्हें शांति दूत, क्षमा मूर्ति और महात्मा कहकर पुकारने लगे। यीशु की दिनो-दिन बढ़ती ख्याति से तत्कालीन राजसत्ता ईर्ष्या करने लगी और उन्हें प्रताड़ित करने की योजनाएं बनाने लगी।

विद्वान यूहन्ना से दीक्षा ली थी यीशु ने
यहूदी विद्वान यूहन्ना से भेंट होना यीशु के जीवन की महत्वपूर्ण घटना थी। यूहन्ना जोर्डन नदी के तट पर रहते थे। यीशु ने सर्वप्रथम जोर्डन नदी का जल ग्रहण किया और फिर यूहन्ना से दीक्षा ली। यही दीक्षा के पश्चात ही उनका आध्यात्मिक जीवन शुरू हुआ। अपने सुधारवादी एवं क्रांतिकारी विचारों के कारण यूहन्ना के कैद हो जाने के बाद बहुत समय तक ईसा मृत सागर और जोर्डन नदी के आस-पास के क्षेत्रों में उपदेश देते रहे।
स्वर्ग के राज्य की कल्पना एवं मान्यता यहूदियों में पहले से ही थी। किंतु यीशु ने उसे एक नए और सहज रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत किया। यीशु ने कहा कि संसार में पाप का राज्य हो रहा है। भले लोगों के लिए रोने-धोने के अलावा इस संसार में और कुछ नहीं है। पाप का घड़ा भर गया है। वह फूटने ही वाला है। इसके बाद ही ईश्वर के राज्य की बारी है। यह राज्य एक आकस्मिक घटना की भांति उदित होगा और मानवता को पुनर्जीवन प्राप्त होगा।

Credit by: dainikbhaskar

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