वन नेशन-वन इलेक्शन : 2019 में 23 राज्यों में एकसाथ हो सकते हैं लोकसभा- विधानसभा चुनाव…..!

उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के आधार पर लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और नगर निकायों का चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश करते हुए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार अमल करती है तो 2019 लोकसभा चुनाव के साथ ही 23 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हो जाएंगे। सिफारिश है कि बीच में अगर लोकसभा या किसी राज्य में विधानसभा चुनाव कराने की स्थिति बनती है तो यह चुनाव शेष अ‌वधि के लिए होगा ना कि पांच साल के लिए।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने अपनी संस्तुतियों में कहा है कि 31 दिसंबर 2021 तक जिन राज्यों में चुनाव होने हैं उन सभी के विधानसभा चुनाव 2019 लोकसभा के साथ ही करा दिए जाएं। ऐसा करने में कुछ राज्यों में विधानसभा की समयावधि घटानी पड़ेगी तो कुछ में बढ़ानी पड़ेगी। ऐसे कुल 23 राज्य हैं जहां 31 दिसंबर 2021 से पहले चुनाव होने हैं।

इसके अलावा जिन राज्यों में 31 दिसंबर 2021 के बाद चुनाव होने हैं उन राज्यों के विधानसभा की अवधि को बढ़ाते हुए वहां पर साल 2024 में होने वाले लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराने का सुझाव है। 31 दिसंबर 2021 तक इन राज्यों में होने हैं चुनाव: आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असोम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, केरला, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पुड्डूचेरी, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल।

अविश्वास प्रस्ताव के लिए ब्रिटेन जैसी व्यवस्था

लोकसभा या विधानसभा बीच में ही भंग होती है तो ऐसे में कुछ देशों के नियमों का अध्ययन किया गया है। ब्रिटेन के अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया का जिक्र किया गया है। ब्रिटेन में चुनाव की तारीखें पहले से ही निर्धारित रहती हैं। ब्रिटेन में तय तिथि से पूर्व चुनाव कराने से पूर्व संसद में दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास कराना जरूरी है। अगर अविश्वास प्रस्ताव पास होता है और 14 दिन के अंदर वैकल्पिक सरकार नहीं बन पा रही है तो बीच में चुनाव हो सकता है। वहीं जर्मनी की व्यवस्था का भी जिक्र किया है। जहां पर अविश्वास प्रस्ताव के साथ ही नई सरकार के लिए विश्वास प्रस्ताव भी पास कराना जरूरी है। यहां पर किसी को चांसलर को अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से हटाने के साथ ही किसी दूसरे को चांसलर बना दिए जाने का विश्वास प्रस्ताव सदन से होना अनिवार्य है।

चुनाव एक साथ होते रहें इसके लिए सुझाव: 

  • अगर कोई सदन तय अवधि से पूर्व भंग हो जाती है तो वहां पर शेष अ‌वधि के लिए ही चुनाव हों। उदाहरण के रूप में अगर 2019 में कहीं चुनाव हुआ है और 2021 में सरकार बहुमत खो देती है तो जो नया चुनाव होगा वह ‌शेष अवधि यानी 2024 तक के लिए ही होगी।
  • यह भी सुझाव है कि यह समयावधि भी तय करनी होगी कि अगर किसी सदन का कार्यकाल दो साल या इससे कम रहता है तो सदन को भंग नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में बीच में चुनाव कराने की स्थिति नहीं आएगी।
  • बीच में सदन भंग करने के लिए अगर अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है तो साथ ही विश्वास प्रस्ताव लाने का प्रबंध भी किया जाए। इसके लिए संविधान में यह व्यवस्था देनी होगी।

सभी चुनावों के लिए एक मतदाता सूची

लोकसभा, विधानसभा, पंचायतें और स्थानीय निकाय चुनाव के लिए एक ही मतदाता सूची बनाए जाने का प्रस्ताव है। इससे मतदाता को अपना नाम एक ही सीरियल नंबर और एक ही मतदान स्थल पर हर चुनाव में मिलेगा। सुझाव दिया है कि सभी चुनावों के लिए पोलिंग सेंटर एक हो। यदि पोलिंग सेंटर में बदलाव आ रहा है तो भी पोलिंग स्टेशन एक ही होनी चाहिए। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बनाए जाने वाले मतदाता सूची में ही लोकल बॉडी के वार्ड भी इंगित कर दिए जाएं। स्थानीय निकाय के वार्ड, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का परिसीमन एक ही साथ कराने का प्रस्ताव है।

Source by: Hindusthan

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *