हिंदी दिवसः हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का सपना नहीं हुआ पूरा, जाने असल वजह!

हिंदी भाषा का इस्तेमाल बढ़ाने के उद्देश्य से प्रति वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। इस दौरान हिंदी पखवाड़ा का आयोजन भी किया जाता है, जिसके अंतर्गत हिंदी कवि सम्मेलन व अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। वो साल 1918 था, आज 2018 है.. सौ साल हो चुके हैं। लेकिन आज तक बापू गांधी के एक सपने को कोई सरकार पूरा नहीं कर पाई है।

महात्मा गांधी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के अपने सपने की घोषणा की थी। फिर देश आजाद हुआ और आज इस घोषणा को 100 साल बीत गए लेकिन कोई भी सरकार बापू के इस सपने को साकार नहीं कर पाई।

आजादी तक राष्ट्रभाषा कही जाने वाली हिंदी संविधान लागू होते ही राजभाषा बन गई। इंदौर में भी महात्मा गांधी मार्ग एमजी रोड हो गया और रवींद्रनाथ टैगोर मार्ग बन गया आरएनटी मार्ग। हिंदी के प्रति अनुराग तो रहा, लेकिन इसे राष्ट्रभाषा बनाने की पहल नहीं हो पाई। 

आजादी तक राष्ट्रभाषा कही जाने वाली हिंदी संविधान लागू होते ही राजभाषा बन गई। इंदौर में भी महात्मा गांधी मार्ग एमजी रोड हो गया और रवींद्रनाथ टैगोर मार्ग बन गया आरएनटी मार्ग। हिंदी के प्रति अनुराग तो रहा, लेकिन इसे राष्ट्रभाषा बनाने की पहल नहीं हो पाई। 

आजादी तक राष्ट्रभाषा कही जाने वाली हिंदी संविधान लागू होते ही राजभाषा बन गई। इंदौर में भी महात्मा गांधी मार्ग एमजी रोड हो गया और रवींद्रनाथ टैगोर मार्ग बन गया आरएनटी मार्ग। हिंदी के प्रति अनुराग तो रहा, लेकिन इसे राष्ट्रभाषा बनाने की पहल नहीं हो पाई। 

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