RSS के बारे में मशहूर हस्तियां की क्या थी सोच जानें……!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)की  स्थापना 27 सितंबर 1 9 25 को हुआ था,  जानें अब तक महान हस्‍त‍ियों ने आरएसएस के बारे में क्‍या कहा है….

  • महात्मा गांधी ने आरएसएस के समाजि‍क कार्यों के लिए कहा था कि इस कार्य में मैं राष्ट्रहित देख रहा हूं. व्यक्तिगत चरित्र ध्येय के प्रति प्रतिबधता है. इस कार्य में आपको सफलता न मिलने का प्रश्न ही नहीं उठता ।
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आरएसएस से जुड़ने से मना करते हुए कहा था कि समाज को संगठित करने में संघ का बताया हुआ मार्ग सही है. पर मैं राजनीति के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ चुका हूं. इस समय आपके साथ चलना संभव नहीं है. क्षमा करें ।
  • मदन मोहन मालवीय ने कहा था कि लोग मुझे “Royal Beggar” कहकर बुलाते है. अगर आप चाहे तो, मैं संघ के लिए धन जुटाऊंगा. इस पर आरएसएस की तरफ से उत्‍तर मिला था कि हमें धन की नहीं, आप जैसे महानुभावों का आशीर्वाद चाहिए. वह हमारे लिए पर्याप्त है..”।
  • डॉ भीमराव अम्बेडकर ने कहा था कि मुझे आश्चर्य होता है यह देखकर कि यहाँ पर स्वयंसेवक किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना, किसी दूसरे की जाति‍ जाने बगैर परस्पर भाईचारे से रह रहे हैं।
  • भारत के पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन मोन्घीर के “मिलाद महफ़िल” में ने कहा था कि आरएसएस के ऊपर दंगा और दहशतगर्दी का आरोप हैं, यह बिल्‍कुल बेबुनियाद है. परस्पर प्रेम, सोहार्द, संगठन ऐसे विचार, मुसलमानों को संघ से सीखना चाहिए ।
  • फील्ड मार्शल करियप्पा ने कहा था कि संघ का काम मेरे ह्रदय के बहुत निकट है. मुसलमान अगर इस्लाम का गुणगान कर सकते हैं, तो संघ हिन्दू का गुणगान करे, इसमें क्या आपत्‍त‍ि हो सकती है? संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार  ने आपके सामने राष्ट्र समर्पित जीवन का आदर्श रखा है. राष्ट्र आज इस तरह की सेवा मांग रहा है ।
  • ओडिशा के भूतपूर्व स्पीकर नीलकंठ शास्त्री जी ने कहा था जब मुसलमानों ने जगन्नाथ को विध्वंश करने की धमकी दी, तो नागपुर के भोंसले महाराज बचाव में आये थे. इस बार भी नागपुर से ही आ रहे है स्वयंसेवक, न केवल उत्कल को बल्कि पूरे भारत को बचाने ।
  • दलाई लामा ने कहा था कि मैं संघ का समर्थक हूं. अनुशासन, देशभक्ति और समाज सेवा के लिए यह संगठन जाना जाता है.
  • लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने नए राष्ट्र का निर्माण जैसे बड़े सवाल को आपने स्वीकारा है. इस संगठन से मुझे बहुत अपेक्षाएं हैं. हमारी ही आंखों के सामने हो रहे परिवर्तन की क्रांति में आप अग्रसर हैं. मुझे संशय नहीं है कि आपके भीतर समाज सेवा और समर्पण का भाव निहित है ।
  • पूर्व जस्टिस एम शी छागला ने कहा था कि पत्रिकाओं में, रेडियो में, हर दिन इंदिरा गांधी कहती रहती हैं कि संघ साम्प्रदायिक है, और हर साम्प्रदायिक दंगे के पीछे संघ का हाथ है, ऐसी कई काल्पनिक बातें करती हैं. यह बिल्‍कुल बेबुनियाद और अनावश्यक बात है. ऐसा कहते हुए, मैं इस सारी बातों को ठुकराता हूं ।
  • पूर्व जस्टिस वीआर कृष्ण अय्यर ने कहा था कि मोहन भागवत को न मैं जनता हूं, न ही मैं संघ के सिदान्तों से सहमत हूं. फिर भी संघ के सदस्यों का राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव, देश के प्रति अप्रतिम प्रेम,राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने का काम, इसको लेकर मेरे मन में हमेशा गौरव रहा है ।
  • भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के बेटे प्रकाश अम्बेडकर ने सितम्बर 2012 में मध्यप्रदेश के सांची में आयोजित ‘हिंदुत्व और बौद्ध धर्म” कार्यक्रम में, कहा था कि “ अगर यह हिंदुत्व है, तो अपने आप को हिन्दू कहने में मुझे कोई झिझक नहीं।
  • पुणे के गांधीवादी फिरोदिया परिवार अभय फिरोदिया विश्व संघ शिविर देखने के लिए नागपुर आये. वे तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग में भी आये. समारोह के अगले दिन संघ कार्यालय में आकर अभय फिरोदिया ने छत्रपति शिवाजी महाराज, रबिन्द्रनाथ ठाकुर, महात्मा गाँधी और बाबासाहेब अम्बेडकर की प्रतिमाएं भेंट दी और कहा, “मैं आपके विचार के साथ हूं.” ।
  • सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आमटे के पास के पास जब संघ के कार्यकर्ता गए थे तब उन्‍होंने कहा, “अब आये हो, मेरे काम शुरू करने के 32 साल के बाद? उन्होंने स्वागत समिति के सदस्य बनना स्वीकार किया और संघ समारोह में पहुंचे थे.
  • दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सेवा संगम में अजीम प्रेमजी ने कहा था कि मोहन भागवत से मिलने के बाद मुझे पता चला कि आप जैसे कई लोगों ने पूरे भारत में, देश की उन्नति के लिए अपना जीवन समर्पित किया है. मुझे लगा, सभी लोग जो देश की उन्नति के लिए काम कर रहें है, वह सभी, जहां संभव है, वहां आपस में मिल-जुलकर काम करें ।
  • पद्मविभूषण डॉ. वीरेंद्र हेगड़े, धर्माधिकारी धर्मस्थल श्रीक्षेत्र, (कर्नाटक) नागपुर में तृतीय समारोह समारंभ में बोलते हुए कहा था कि मैं कई दशकों से संघ के साथ जुड़ा हूं. समाज में कई सकारात्मक बदलाव का मैं अनुभव कर रहा हूं. समाज में जो असमानता थी, वह कम हो रही है, संघ की इसमें सक्रिय सहभागिता रही है. जब भी आवश्यकता पड़ी है, उन सभी समय में, नि:स्वार्थ भाव से, संघ सेवा कार्य में जुड़ गया है. हाल ही में नेपाल के भूकंप में भी यह देखने को मिला है ।
  • डॉ. कैलाशनाथ काटजू, जो पंडित नेहरु के मंत्रिमंडल में गृह एवं रक्षा मंत्री थे, ने इलाहाबाद में संघ की एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘संघ के शिविर में पहले भी गया हूं. चीन के आक्रमण के बाद देश में एकता के बारे में जागृति आयी है. युद्ध हो या शांति, हर समय एकता रहनी चाहिए. इसी एकता को लाने में डॉ. हेडगेवार ने प्रयत्न किया था. कौन कहता है यह हिन्दू राष्ट्र नहीं है? मैं इसका एक छोटा स्वरूप देख रहा हूं.’ ।
  • पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सर सिकंदर हयात खान ने 1938 में संघ के बारे में, स्वयंसेवको से कहा था कि एक दिन संघ देश में एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरकर आएगा. मेरा आशीर्वाद आपके साथ है ।
  • आचार्य विनोभा भावे ने कहा था, ‘मैं संघ का विधिवत सदस्य नहीं हूं, फिर भी, स्वभाव से, परिकल्पना से मैं स्वयंसेवक हूं’ ।
  • इस्लामी चिंतक वहीदुद्दीन खान नागपुर के विजयदशमी उत्सव में पहुंचे थे.  उन्‍होंने हेडगेवार की मुर्त‍ि पर माला भी चढ़ाई थी ।T

Source By: AAJ TAK

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *